दीवाली पर कुछ लाईनें उन शहीदों के लिए जिनके
बलिदानों से ये दीवाली रोशन है
रोशन करके कई चिराग जो निर निद्रा सोया होगा
उस घर में दीवाली पर दीपक भी रोया होगा
मना रहे हैं हम ये खुशिया जिनके बलिदानों से आज
उनके घर में शायद आज मातम सा छाया होगा
बैठी होगी माता उसकी, दरवाजे पे पगलाई सी
हर आहट पे सोचे शायद, बेटा उसका आया होगा
रो -रो के तो पत्नी के अब आंसू सूख गये होंगे
दो दिन से तो शायद उसने खाना ना खाया होगा
मासूमों की आंखों में सवाल तो तैरते होंगे
और माँ से तो शायद कुछ बतलाया ना जाता होगा
दीवाली पर हम दो दीपक उन शहीदों के भी जलाएं
जो चले गये हैं इस दुनिया से, वापिस ना आना होगा
बलिदानों से ये दीवाली रोशन है
रोशन करके कई चिराग जो निर निद्रा सोया होगा
उस घर में दीवाली पर दीपक भी रोया होगा
मना रहे हैं हम ये खुशिया जिनके बलिदानों से आज
उनके घर में शायद आज मातम सा छाया होगा
बैठी होगी माता उसकी, दरवाजे पे पगलाई सी
हर आहट पे सोचे शायद, बेटा उसका आया होगा
रो -रो के तो पत्नी के अब आंसू सूख गये होंगे
दो दिन से तो शायद उसने खाना ना खाया होगा
मासूमों की आंखों में सवाल तो तैरते होंगे
और माँ से तो शायद कुछ बतलाया ना जाता होगा
दीवाली पर हम दो दीपक उन शहीदों के भी जलाएं
जो चले गये हैं इस दुनिया से, वापिस ना आना होगा