हंमें तो मुहम्मद से शिकवा नहीं था
उन्हें राम से फिर ये शिकायत क्यूं है
मस्जिद की अजानों को हमने ना कोसा
मन्दिर की घटियों से ये नफरत क्यूं है
बेवजह खूं बहाने की हमें नहीं आदत
कत्ल करने की फिर उन्हें फितरत क्यूं है
हमने सदा अमन कायम करना चाहा
हंगामा करने की उन्हें हसरत क्यूं है
‘पथिक’