Friday, 9 May 2014

मन्दिर में जिन्होंने कभी मत्था ना टेका

मन्दिर में जिन्होंने कभी मत्था ना टेका 
वो मजारों पे फूल चढ़ाये जा रहे हैं
राम के नाम से जुबां जिनकी दुखती
वो मुहम्मद के गुण गाए जा रहे हैं
आरती से जिनके हाथ कांपते थे
वो अजानों में हाथ उठाए जा रहे हैं
राम नाम जिनको साम्प्रदायिक लगता
वो अल्ला-हू-अकबर गाए जा रहे हैं
कुमकुम की लाली में जिन्हें खून दिखता
वो टोपी क्यूं जाने लगाए जा रहे हैं
वोटों की खातिर क्यूं ये राजनेता
राजनीति का शीष झुकाए जा रहे हैं

‘पथिक’