Monday, 1 June 2015

पथिक

बेशक ये राहें लम्बी है लेकिन
पथिक का तो कोई ठिकाना नहीं है

डगर तेरी आसान हो चाहे मुश्किल
रूकने का कोई बहाना नहीं है

चलते ही जाना है बस काम तेरा
भले साथ चाहे जमाना नहीं है

कड़ी धूप हो चाहे हो ठण्डी छांव
थक कर तुझे कभी सोना नहीं है

बाधाओं का हंस के कर सामना तू
डर के कभी तुझे रोना नहीं है

ना मालूम कब कोई आके ये कह दे
रूक जा कि तेरा ठिकाना यहीं है

पवन प्रजापति ‘पथिक’