बेशक ये राहें लम्बी है लेकिन
पथिक का तो कोई ठिकाना नहीं है
डगर तेरी आसान हो चाहे मुश्किल
रूकने का कोई बहाना नहीं है
चलते ही जाना है बस काम तेरा
भले साथ चाहे जमाना नहीं है
कड़ी धूप हो चाहे हो ठण्डी छांव
थक कर तुझे कभी सोना नहीं है
बाधाओं का हंस के कर सामना तू
डर के कभी तुझे रोना नहीं है
ना मालूम कब कोई आके ये कह दे
रूक जा कि तेरा ठिकाना यहीं है
पवन प्रजापति ‘पथिक’
पथिक का तो कोई ठिकाना नहीं है
डगर तेरी आसान हो चाहे मुश्किल
रूकने का कोई बहाना नहीं है
चलते ही जाना है बस काम तेरा
भले साथ चाहे जमाना नहीं है
कड़ी धूप हो चाहे हो ठण्डी छांव
थक कर तुझे कभी सोना नहीं है
बाधाओं का हंस के कर सामना तू
डर के कभी तुझे रोना नहीं है
ना मालूम कब कोई आके ये कह दे
रूक जा कि तेरा ठिकाना यहीं है
पवन प्रजापति ‘पथिक’