देश में जब कोई सैनिक शहीद होता है तो उसके परिवार पर क्या बीतती है उसी को दर्शाती कुछ लाईनें
फिर आज देश की सरहद पर भड़क उठी चिंगारी थी
छुट्टी पर जाना था उसको पर देश की जिम्मेदारी थी
हाथों में हथियार लिये वो कुछ ये हाल कर बैठा
दुश्मन के लोहू से अपनी धरती लाल कर बैठा
दीवाली के दीप जले पर उसके लिए तो होली थी
तभी सीने के पार हुई वो दुश्मन की इक गोली थी
लेकिन भारत का सैनिक इतनी जल्दी कैसे हार गया
मरते मरते भी वो सैनिक दो चार को तो मार गया
खुशियों के माहौल में तब एकदम से उदासी छाई थी
सैनिक की शहादत की खबर जब उसके घर आई थी
बूढ़े बाप की आंखों में भी पानी तब भर आया
तिरंगे में लिपटे उस सैनिक का शव जब घर आया
कई रातों से जगा हुआ वो चिर निद्रा में सोया था
और राखी पर बहना से राखी ना बंधवा पाया था
माँ भी थी पगलाई सी देहरी पर जाकर बैठी थी
बेटे के आने की झूठी आस लगाकर बैठी थी।
पत्नी की हालत लेकिन शब्दों में समा ना पाएगी
उसके पतझड़ में तो अब कभी बहार ना आएगी
छोटे छोटे मासूमों को बात यही बतला पाते
पापा गये हैं दूर देश कोई लौट जहां से ना पाते
‘पथिक’