Monday, 17 August 2015

फिर आज देश की सरहद पर

देश में जब कोई सैनिक शहीद होता है तो उसके परिवार पर क्या बीतती है उसी को दर्शाती कुछ लाईनें फिर आज देश की सरहद पर भड़क उठी चिंगारी थी छुट्टी पर जाना था उसको पर देश की जिम्मेदारी थी हाथों में हथियार लिये वो कुछ ये हाल कर बैठा दुश्मन के लोहू से अपनी धरती लाल कर बैठा दीवाली के दीप जले पर उसके लिए तो होली थी तभी सीने के पार हुई वो दुश्मन की इक गोली थी लेकिन भारत का सैनिक इतनी जल्दी कैसे हार गया मरते मरते भी वो सैनिक दो चार को तो मार गया खुशियों के माहौल में तब एकदम से उदासी छाई थी सैनिक की शहादत की खबर जब उसके घर आई थी बूढ़े बाप की आंखों में भी पानी तब भर आया तिरंगे में लिपटे उस सैनिक का शव जब घर आया कई रातों से जगा हुआ वो चिर निद्रा में सोया था और राखी पर बहना से राखी ना बंधवा पाया था माँ भी थी पगलाई सी देहरी पर जाकर बैठी थी बेटे के आने की झूठी आस लगाकर बैठी थी। पत्नी की हालत लेकिन शब्दों में समा ना पाएगी उसके पतझड़ में तो अब कभी बहार ना आएगी छोटे छोटे मासूमों को बात यही बतला पाते पापा गये हैं दूर देश कोई लौट जहां से ना पाते ‘पथिक’