Wednesday, 31 January 2018

तुम क्या जानो

तुम क्या जानो मेरी तन्हाई में कितने गम होते हैं
मुस्कानों में गम को छुपा ले ऐसे लोग कम होते हैं
मेरे इस हंसते चेहरे से कहीं धोखा ना खा जाना
इस हंसते चेहरे के पीछे जाने कितने समझौते हैं।

Thursday, 11 January 2018

चन्द लाईनें...

चन्द लाईनें...
अक्सर कई बार
मेरे पुरजोर प्रयास
व्यर्थ हो ही जाते है।
मेरी सारी कोशिशें
बेकार हो ही जाती है
मैं चाह कर भी
रोक नहीं पाता हूं
छलकने से
प्रेम की गागर को
जो अक्सर
तुम्हे देखकर
छलकने को
आतुर हो ही जाती है
और हार जाता हूँ मैं
प्रेम से विवश होकर
लेकिन इस हार में भी
कहीं न कहीं
छिपी है जीत
और पीड़ा की जगह
आनन्द