धर्मान्तरण पर कुछ लाईनें
वो चाकू की नोंक पर
मजहब बदलवा देते हैं
मैं खामोशी से घर वापसी
करा बैठा तो हंगामा
वो झुठा राम खुदा सच्चा
बताते थे तोे कुछ भी नहीं
मैं बस इक राम को सच्चा
बता बैठा तो हंगामा
भोले भाले नादानों को
वो गुमराह करें सब चुप
मैं गुमराहों को राह पर
ला बैठा तो हंगामा
अपने धर्म की बातें तो
सभी दुनिया में करते हैं
मैं भी अगर वही बातें
कर बैठा तो हंगामा
वो सुबह ओ शाम बातें
करते हैं खून खराबे की
मैं अमन की कोई बात भी
कर बैठा तो हंगामा
‘पथिक’