Thursday, 6 May 2021

लोकडाउन का प्रेम पत्र

लॉकडाउन में फंस गये प्रेमी/पति का अपनी प्रेमिका/पत्नी को कोरोना संक्रमित प्रेम पत्र

प्रिये!
आज तुमसे दूर हुए एक माह से अधिक हो गया है। सत्यानाश हो इस महामारी का जिसने मुझे तुमसे इतना दूर कर दिया। इतने लम्बे समय तुमसे दूर रहने के बाद मेरी हालत ऐसी हो गयी है जैसी बिना 'आॅक्सीजन सिलेण्डर' के कोरोना मरीज की हो जाती है। उठते - बैठते तुम्हारा ही चेहरा दिखाई देता है।  तुम्हारी यादों से दिलो-दिमाग की हालत बिल्कुल वैसी ही हो गयी है जैसी 'कोरोना' संक्रमिक फेफड़ों' की हो जाया करती है। तुम्हारे बिना सांस लेना भी दूभर हो गया है, ऐसा लगता है मानों मेरा 'आॅक्सीजन लेवल' गिर रहा हो। 
बहुत प्रयास करता हूँ कि कुछ 'पाॅजिटिव' ही सोचूं लेकिन फिर भी मन में 'नेगेटिव' विचार ही आते हैं। कहीं मन नहीं लगता। यदि पंख होते तो उड़कर तुम्हारे पास पहुंच जाता लेकिन यहां तो बाहर निकलना भी मुश्किल है। दरवाजे के बाहर ही हवलदार लाठी लेकर बैठा रहता है।
काश उस दिन तुम्हारी बात मान लेता और एक दिन रूक जाता तो यहां ना फंसता। 'दो गज दूरी' की जगह तुमसे मीलों दूर आ बैठा।  कितना अजीब है ना? जब मैं एक ही छत के नीचे तुम्हारे साथ था तो भी लगता था जैसे 'क्वारंटाईन' हो रखा हूँ, पास होकर भी लगता था जैसे 'आईसोलेशन' में हूँ, लेकिन आज तुमसे इतनी दूर होकर महसूस होता है कि तुम मेरे लिये उतनी ही जरूरी हो जितने की मास्क और सेनेटाईजर होते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि तुममें ही मुझे मेरी जीवन रक्षक 'वैक्सीन' नजर आती है। 
कहते हैं ना कि कितना ही कठिन समय हो गुजर ही जाता है, इसी प्रकार यह मुश्किल समय भी गुजर ही जायेगा और हम फिर से मिल जायेंगे। हमारे बीच का भी 'क्वारंटाईन' जल्द ही खत्म हो जायेगा। और हां, अबकी बार तुम अपने प्रेम से मुझे 'सेनेटाईज' करके  दिल में हीं कैद कर देना और आजीवन 'लाॅकडाउन' घोषित कर देना।