Wednesday, 9 June 2021

शवयात्रा

शवयात्रा
महामारी को लेकर पूरे प्रदेश में 'तालाबन्दी' कर दी गयी थी। बाजार बन्द कर दिये गये थे। कुछ धनवान इसे उचित अवसर समझ अन्य देशों में भ्रमण के लिये निकल गये। जो कहीं घूमने न जा सके उन्होंने घर पर ही रहना उचित समझा।
दिहाड़ी मजदूरों व गरीबों के लिये सरकार ने फैक्ट्रियों में काम सुचारू रखा गया था ताकि मजदूरों के पलायन को रोका जा सके। मंगलू भी अपनी पत्नी के साथ एक फैक्ट्री में काम करता था। पेट की भूख मौत के डर से कहीं भयानक होती है। अगर मंगलू काम न करता तो अपना व बच्चों का पेट कैसे पालता। पिछली तालाबन्दी में फैक्ट्रियां बन्द होने के कारण मंगलू को अपने गांव हजारों किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ा था। रोटी के भी लाले थे। इस बार गनीमत थी कि फैक्ट्रियों में काम सुचारू था। कम से भूखो तो नहीं मरना पड़ेगा। बिमारी अमीर — गरीब का भेद नहीं देखती। आखिरकार मंगलू की पत्नी भी महामारी की चपेट में आ गयी। लाख कोशिश करके भी मंगलू उसे बचा नहीं पाया। चाँद पर पहुंच चुका व्यक्ति आज भी सामाजिक कुरीतियों के बन्धन से बाहर नहीं निकल पाया था। पत्नी की मृत्यु पर मंगलू को भी सामाजिक रीति रिवाज के चलते या यूं कहें कि समाज के तानों से बचने के लिये छोटा ही सही मृत्युभोज का आयोजन करना ही पड़ा। मंगलू ने कर्ज लेकर लगभग सौ— डेढ़सो आदमियों के भोजन का आयोजन किया। भोजन के दौरान ही पुलिस ने छापा मार दिया। लोग डर के मारे भोजन छोड़ कर ही भाग गये। सारा भोजन जब्त कर लिया गया। मंगलू पर महामारी के दौरान 'मृत्युभोज' का आयोजन कर महामारी फैलाने के अपराध में दस हजार का जुर्माना लगाया गया।
बिमारी सचमुच अमीर—गरीब का भेद नहीं देखती। दूसरे दिन शहर में प्रदेश के बड़े नेता की पत्नी की महामारी के चलते मृत्यु हो गयी थी। हजारों लोग मंत्रीजी की पत्नी की शवयात्रा में सम्मिलित हुए जिनमें मंगलू भी शामिल था। कल मंगलू पर जुर्माना लगाने वाले अधिकारी आज इस शवयात्रा की सुरक्षा में तैनात थे।