चुनावों की तारीखें तय हो चुकी है। कुछ दिनों बाद ही नयी सरकार चुनी जाएगी। बहुत सारी पार्टियां चुनावों में ताल ठोक रही है। पार्टियों के समर्थकों में भी जबरदस्त जोश है। दो प्रमुख पार्टियों में कड़ी टक्कर बतायी जा रही है। दोनों पक्षों की विचारधाराएं भी नदी के उन दो तटों की भांति हैं जो कभी मिल नहीं सकते। दोनों ही पक्षों के समर्थक मानों अपने — अपने नेता को ही ईश्वर मान बैठे थे।
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ओर से एक दूसरे के विरूद्ध जमकर आरोप प्रत्यारोप लगे जिनमें भाषायी मर्यादाएं सैंकड़ों बार तार — तार हुई।
वाद — विवाद झगड़े व झगड़े बड़ी लड़ाईयों में बदल गये जिसने दंगों का रूप ले लिया। नेताओं के भाषणों ने इसमें आग में घी का काम किया। दोनों पार्टियों के कई समर्थक दंगों की भेंट चढ़ गये। मतदान के दिन भी भारी झड़पें हुई जिसमें दर्जनों लोग मारे गये। मारे गये लोगों में दोनों पक्षो के लोग शामिल थे। भारी सुरक्षा में मतदान सम्पन्न करवाया गया।
चंद दिनों में ही चुनावों के परिणाम घोषित किये गये। किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। दोनों विरोधी पार्टियों ने एक दूसरे को समर्थन देकर मिली जुली सरकार बना ली। विचारधाराओं के शवों पर नयी सरकार का गठन हो गया। चुनावों के दौरान मारे गये लोगों के लिए मुआवजे की घोषणा कर दी गर्यी प्रदेश में अब पूरी तरह से शान्ति है।