'टिकट'
उसे किसी ने कह दिया है कि तुम्हारा टिकट पक्का है। ऊपर से बात हो गयी है। एक बारगी तो आदमी 'ऊपरवाले' को जान ले लेकिन यह जो राजनीति का 'ऊपरवाला' है इसके बारे में अभी तक शोध जारी है। आश्वासन मिलने के बाद से ही उसके रंग बदले हुए हैं। उसके बदले रंग देखकर गिरगिटों को अस्तित्व संकट अनुभव होने लगा। उसने तुरन्त दर्जन भर खादी के कुरते पायजामे सिलवा लिये। भावशून्य चेहरे पर अब सदैव बनावटी मुस्कान बिखरी रहती व हाथ हमेशा नमस्कार की मुद्रा में जुड़े रहते। रिश्तेदारों व मित्रों से पैसों का जुगाड़ कर लिया। बाकी कसर जमीन बेच कर पूरी कर ली। क्षेत्र के कुछ अति चतुर लोग उसकी महत्वाकांक्षा को ताड़ गये थे वे अब उसके साथ हो लिए। ये लोग अपने नेता की झूठी तारीफ (चालपूसी) से ऐसा माहौल बनाये रखते कि वह उससे आगे कुछ देख ही नहीं पाता। बदले में वह उनके खाने — पीने सहित तमाम खर्चे उठाता। सभाओं का दौर शुरू हो गया। उसने क्षेत्र के विकास के लिए अपना घोषणा पत्र भी जारी कर दिया। क्षेत्र में चारों तरफ बैनर व होर्डिंग टंग गये जिसमें उसे 'गरीबों का मसीहा' 'जननायक' जैसे कई उपनामों से सम्बोधित किया गया था। वह अब अपने आपको 'विधायक' मान चुका था।
इसी बीच पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जिसमें उसका कहीं नाम न था। जिस 'ऊपरवाले' ने आश्वासन दिया था वह अब सम्पर्क क्षेत्र से बाहर था। हमेशा वह जिन लोगों से गिरा रहता वे लोग अब असली उम्मीदवार के साथ थे। सपनों की इबारत ढह चुकी थी जिसके मलबे तले वह स्वयं दबा पड़ा था।