Wednesday, 3 July 2024

तस्वीरी खयाल : बेफिक्री छत पर पसरी है


 हर खाली सिर लादे बैठा देखो चिंता की गठरी है
हंसते चेहरों के पीछे भी समझौतों की एक लड़ी है
युग से आंखें बाट देखती नीन्द का पंछी लौट ना पाया
व्याकुलता गद्दों पर जागे बेफिक्री छत पर पसरी है