Wednesday, 6 February 2019

लघु कथा : भेड़ और इन्सान

लघु कथा : भेड़ और इन्सान
शाम का समय था, भेड़ों का झुण्ड घर की ओर लौट रहा था। अपनी आदतानुसार बेफिक्र होकर भेड़ें भी अपने पैरों से धूल उड़ाते हुए एक दूसरे के पीछे चली जा रही थी। यातायात के नियमों को जहां इन्सान भी पालन नहीं करते वहां भेड़ों से इस बात की उम्मीद करना भी बेमानी था। उसी दौरान सामने से एक कार आती है जो भेड़ों के विशाल झुण्ड को देखकर रूक जाती है। कार चालक समझ जाता है कि ये भेड़ें हैं और ये अपने हिसाब से ही चलेंगी इसलिए रूकने में ही फायदा है। चालक कार को एक तरफ पार्क कर भेड़ों के निकलने का इन्तजार करने के लिए खड़ा हो जाता है और अपने साथी से कहता है — ''ये भेड़ें भी ना, बिल्कुल बेवकूफ जानवर है, भला ये भी कोई तरीका है सड़क पर चलने का और वो भी इतने बड़े झुण्ड में, जैसे पूरी सड़क इनके बाप की हो।''
उनकी बात को पास ही चल रही एक भेड़ ने सुन लिया और तपाक से बोली — ''क्यों भाई हम भेड़ों को क्यों कोस रहे हो, हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?''
दोनों आदमी चौंक गये, क्योंकि एक भेड़ से इस प्रकार के उत्तर की आशा उन्हें नहीं थी?
कार चालक बोला — ''कोसें नहीं तो क्या करें, ये भी भला कोई तरीका है झुण्ड में चलने का, यदि तरीका सीखना हो तो हम आदमियों से सीखो, तुम्हारे कारण हम कब से परेशान हैं?''
भेड़ बोली — ''कौनसा तरीका सीखें भाई, हम तो भेड़ें हैं सो भेड़चाल हमारा स्वभाव है! लेकिन तुम तो इन्सान हो, फिर हमारी चाल क्यों चलते हो?''
चालक — ''क्या बकवास कर रही हो''
''और नहीं तो क्या, हम तो भेड़ें हैं इसीलिए झुण्ड में चलती है लेकिन
इतना तो है कि एक झुण्ड में चलती हैं, कभी आपस में लड़ती नहीं है। और तुम इन्सान होकर जाति, धर्म, सम्प्रदाय के नाम पर जाने कितने झुण्ड बनाकर बैठे हो, जिस तरह हमें हांकने वाला गडरिया है उसी प्रकार तुम्हें भी तो हांकने वाले हैं जो जाति, धर्म, सम्प्रदाय के नाम पर हांकते हैं। बिना कुछ सोचे विचारे तुम उनके कहने पर मरने — मारने पर उतारू हो जाते हो बताओ फिर ये भेड़चाल नहीं तो क्या है?''
दोनों चकित होकर भेड़ को सुने जा रहे थे
''तुम कहते हो इन्सानों से तरीका सीखें, भला बताओ कौनसा तरीका सीखें, आपस में एक दूसरे को मारने का, नफरत फैलाने का, जातियों के आधार पर एक दूसरे से लड़ने का बताओ भला कौनसा तरीका है तुम्हारा जो हम सीखें।''
दोनों निरूत्तर थे
''वो तो तुमने हमारी 'भेड़ जाति' को लेकर ऐसी बात कह दी थी जिससे हमारा स्वाभिमान आहत हो गया इसलिए तुम्हे जवाब देना उचित समझा। हम तो भेड़ें हैं इसलिए हमारी चाल बदलने की उम्मीद मत करना और हो सके तो खुद की चाल बदलने की कोशिश करना''

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