Friday, 27 September 2019

स्वाहा हो गये

नैनों से नैना बतियाये अ​धर मौन फिर हो गये
मैं उनमें खो बैठी वो भी, मेरे दिल में खो गये
इसके आगे क्या बोलूं मैं, वहीं हुआ जो होना था
प्रेम यज्ञ के हवन कुण्ड में दोनों स्वाहा हो गये

Wednesday, 25 September 2019

गा ना सका

दूर कुछ यूं हुआ कि पास आ न सका
तुम थी मंजिल मेरी और मैं पा ना सका
प्रेम धुन पर जिसे गुनगुनाना था मुझे
गीत वो तुम्ही तो थी और मैं गा न सका
चन्द पैसों के लिये, सूकूं गंवा चुका हूं मै
शहर आ गया तो फिर गांव जा ना सका
क्या हुआ जो कामयाबी की मीनार पर खड़ा
कदमों तले अगर तू जमीन पा ना सका