दूर कुछ यूं हुआ कि पास आ न सका
तुम थी मंजिल मेरी और मैं पा ना सका
प्रेम धुन पर जिसे गुनगुनाना था मुझे
गीत वो तुम्ही तो थी और मैं गा न सका
चन्द पैसों के लिये, सूकूं गंवा चुका हूं मै
शहर आ गया तो फिर गांव जा ना सका
क्या हुआ जो कामयाबी की मीनार पर खड़ा
कदमों तले अगर तू जमीन पा ना सका
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