Wednesday, 25 September 2019

गा ना सका

दूर कुछ यूं हुआ कि पास आ न सका
तुम थी मंजिल मेरी और मैं पा ना सका
प्रेम धुन पर जिसे गुनगुनाना था मुझे
गीत वो तुम्ही तो थी और मैं गा न सका
चन्द पैसों के लिये, सूकूं गंवा चुका हूं मै
शहर आ गया तो फिर गांव जा ना सका
क्या हुआ जो कामयाबी की मीनार पर खड़ा
कदमों तले अगर तू जमीन पा ना सका

No comments:

Post a Comment