Tuesday, 25 February 2020

आस्तीन के सांप

मन में जिसके छल भरा हो, सच्चे की करता नकल है
उसको ही छलता सदा है, जो सहज है जो सरल है
आस्तीनों में तुम अपनी, सांप रखना छोड़ दो अब
कितना ही अमृत पिला दो, उगलता हर दम गरल है

Thursday, 20 February 2020

अन 'पढ़'


मेरी मॉं अनपढ़ नहीं है
कुछ 'लिख' भले ना पाये
लेकिन
'पढ़' लिया करती है
मेरे चेहरे के भावों को
तब से
जब बोल भी नहीं
पाता था मैं
आज मैं बहुत कुछ
'लिख' सकता हूं
किन्तु 'पढ़' नहीं सकता
'मॉं' के चेहरे के भावों को
मैं सच में अन 'पढ़' हूॅं