मन में जिसके छल भरा हो, सच्चे की करता नकल है
उसको ही छलता सदा है, जो सहज है जो सरल है
आस्तीनों में तुम अपनी, सांप रखना छोड़ दो अब
कितना ही अमृत पिला दो, उगलता हर दम गरल है
उसको ही छलता सदा है, जो सहज है जो सरल है
आस्तीनों में तुम अपनी, सांप रखना छोड़ दो अब
कितना ही अमृत पिला दो, उगलता हर दम गरल है