एक गाँव का शहर को सन्देश
है शहर तू बड़ा जानता हूँ मगर
भूख से मरते इंसां भी देखे यहीं
मैं भले एक छोटा सा गांव सही
जानवर भी यहां भूखे मरते नहीं
तेरी सड़कों पे नंगई बिखरी हुई
मेरी गलियों में शर्मो हया है खड़ी
यहां मातम में रोने को कन्धे बहुत
तेरे शहरों में लाशें भी तन्हा पड़ी
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