Tuesday, 2 June 2020

एक गाँव का शहर को सन्देश

एक गाँव का शहर को सन्देश

है शहर तू बड़ा जानता हूँ मगर
भूख से मरते इंसां भी देखे यहीं
मैं भले एक छोटा सा गांव सही
जानवर भी यहां भूखे मरते नहीं

तेरी सड़कों पे नंगई बिखरी हुई
मेरी गलियों में शर्मो हया ​है खड़ी
यहां मातम में रोने को कन्धे बहुत
तेरे शहरों में लाशें भी तन्हा पड़ी

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