तुमको मुझसे प्यार ना हो
प्रेम के पथ पर अकेला
तुम कहो तो कूच कर दूं
जाओ तुमको मुक्त कर दूं
क्या भला है दोष मेरा
रह न पाउं बिन तुम्हारे
काटने को दौड़ती है
ये छतें औ ये दीवारें
क्या तुम्हे स्वीकार मैं
तन्हाई से अनुबन्ध कर दूं
जाओ तुमको मुक्त कर दूं
सुन लिया करती थी तुम तो
बोलती जो मेरी आंखें
आज क्यूं सुनती नहीं हो
इस हृदय की मौन चीखें
पर कहां सम्भव हृदय से
प्रेम का ही अन्त कर दूं
जाओ तुमको मुक्त कर दूं
प्रेम का मेरे भले ही
आज तुमको मोल ना हो
और इन होठो पे कोई
प्रेम के भी बोल ना हो
प्रेम से पाषाण को भी
आज मैं द्रवीभूत कर दूं
जाओ तुमको मुक्त कर दूं
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