कटे शहीदों के शीश लिख दूं
होती चीख पुकार लिख दूं मातम के माहौल में बोलो केसे प्रणय के गीत लिख दूं नारी की लुटती इज्जत लिखदूं तमाशबीन वो भीड़ लिख दूं बेशर्मी के दौर में बोलो शर्मो हया मैं कैसे लिख दूं विधवाओं की सूनी मांगे लिख दूं राखी ले बैठी बहना लिख दूं पतझड़ के मौसम में बोलो कैसे बहारों के गीत लिख दूं भूखा नंगा बचपन लिख दूं कपड़ों को तरसता तन लिख दूं देख देश की दुर्दशा कैसे भारत महान लिख दूँ
पवन प्रजापति 'पथिक'