Sunday, 3 February 2013

बेदम सा तन उखड़ी साँसें
प्यासी आँखें मौत तलाशे
सूखीं आंतें मुरझा चेहरा
नंगा बदन बस भरता आहें

लम्हा लम्हा टूटती सांसें
रेत ज्यूं फिसले मुट्ठी से
पल पल बढ़ता घोर अंधेरा
रोशनी अब लाऊं कहां से

हर पल मद्धि़म होती धड़कन
दिल भी अब आराम तलाशे
हर पल दूर भागती जिन्दगी
मौत है अब नजदीक यहां से

भूख के आगे हारी जिन्दगी
मौत का आगोश तलाशे
रह गया अब हड्डियों का ढांचा
जलने को शमशान तलाशे

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