आज जो ये चेहरा तुम्हारा
फूलों सा है खिला हुआ
लेकिन समय के साथ
इसको कल मुरझाना ही होगा
गालों की लाली जो तेरी
चहुं ओर रोशनी बिखेर रही
कल को इस रोशनी में भी
अंधेरा छाना ही होगा
नाजुक से ये होठ जो तेरे
जिस कदर मुस्काते हैं
कल को इन होठों से भी
मुस्कान को जाना ही होगा
कजरारे कजरारे नैनों
से तुम घायल करती हो
कल को इन नैनों को भी
खुद घायल होना ही होगा
काले काले मेघों को
लज्जित करते हैं केश आज
कल को इन केशों को भी
खुद लज्जित होना ही होगा
ये रूप रंग मदमाता यौवन
ये सब कुछ तो नश्वर है
चिर युवा है प्रिये प्रेम मेरा
जो सदा अजर और अमर है
पवन प्रजापति ‘पथिक’
फूलों सा है खिला हुआ
लेकिन समय के साथ
इसको कल मुरझाना ही होगा
गालों की लाली जो तेरी
चहुं ओर रोशनी बिखेर रही
कल को इस रोशनी में भी
अंधेरा छाना ही होगा
नाजुक से ये होठ जो तेरे
जिस कदर मुस्काते हैं
कल को इन होठों से भी
मुस्कान को जाना ही होगा
कजरारे कजरारे नैनों
से तुम घायल करती हो
कल को इन नैनों को भी
खुद घायल होना ही होगा
काले काले मेघों को
लज्जित करते हैं केश आज
कल को इन केशों को भी
खुद लज्जित होना ही होगा
ये रूप रंग मदमाता यौवन
ये सब कुछ तो नश्वर है
चिर युवा है प्रिये प्रेम मेरा
जो सदा अजर और अमर है
पवन प्रजापति ‘पथिक’
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