वर्माजी कोर्ट के वरिष्ठ जज थे। समय पर आना उनकी आदत में शुमार था। सोमवार को कोर्ट पहुंचे तो न्यायालय परिसर के हालात देख सन्न रह गए। न्यायालय परिसर में हजारों की संख्या में बकरियां मौजूद थी। किसी को अन्दर नहीं घुसने नहीं दे रही थी। जज साहब को देखते ही युनियन की अध्यक्षा बकरी जज साहब के पैरों में लोट गई
''मांई बाप न्याय कीजीए हमारे साथ''
''अरे छोड़ो, ये कौनसा तरीका है'' पैर छुड़ाते हुए जज साहब बोले
''क्या परेशानी है तुम लोगों की''
बकरी सुबकते हुए बोली ''मांई बाप हम लोग तो पुरुषों के ही भरोसे पर हैं, हमेशा उनके जुल्म सहे हैं, कभी उफ तक न की, यहां तक कि हमारे बच्चे इनका निवाला बने लेकिन कभी कुछ नहीं की लेकिन अब तो हद ही हो गई''
''क्यों क्या हुआ?'' जज साहब बोले
''हमारी इज्जत के साथ खिलवाड़ हुआ है जज साहब, हमारी एक साथी जो कि गर्भवती थी, का 6—7 आदमियों ने मिलकर बलात्कार कर दिया, तड़प—तड़प के मर गई बिचारी''
''ओह! ये तो बहुत बुरी बात है''
''जी हां जज साहब, ये सब हमारी आंखों के सामने हुआ है इसलिए हम खुद कोर्ट आई है गवाही देने''
''वो ठीक है लेकिन कोर्ट तुम लोगों की गवाही नहीं मान सकता क्योंकि तुम जानवर हो और ये इन्सानों की कोर्ट है''
''यदि हम जानवर है जज साहब तो जिन्होंने बलात्कार किया वो कौन थे, माफ करें लेकिन हमने अपना जानवर पन नहीं छोड़ा, इन्सानों ने जरूर अपनी इन्सानियत छोड़ दी है''
जज साहब निरूत्तर थे
''जज साहब स्वाभिमान हमारा भी है, हो सके तो आपके संविधान के पन्नों के किसी कोने में हमारे लिए भी जगह ढूंढिये या अबकी ईद पर बकरों की जगह बकरियों को कटने दीजिए
''मांई बाप न्याय कीजीए हमारे साथ''
''अरे छोड़ो, ये कौनसा तरीका है'' पैर छुड़ाते हुए जज साहब बोले
''क्या परेशानी है तुम लोगों की''
बकरी सुबकते हुए बोली ''मांई बाप हम लोग तो पुरुषों के ही भरोसे पर हैं, हमेशा उनके जुल्म सहे हैं, कभी उफ तक न की, यहां तक कि हमारे बच्चे इनका निवाला बने लेकिन कभी कुछ नहीं की लेकिन अब तो हद ही हो गई''
''क्यों क्या हुआ?'' जज साहब बोले
''हमारी इज्जत के साथ खिलवाड़ हुआ है जज साहब, हमारी एक साथी जो कि गर्भवती थी, का 6—7 आदमियों ने मिलकर बलात्कार कर दिया, तड़प—तड़प के मर गई बिचारी''
''ओह! ये तो बहुत बुरी बात है''
''जी हां जज साहब, ये सब हमारी आंखों के सामने हुआ है इसलिए हम खुद कोर्ट आई है गवाही देने''
''वो ठीक है लेकिन कोर्ट तुम लोगों की गवाही नहीं मान सकता क्योंकि तुम जानवर हो और ये इन्सानों की कोर्ट है''
''यदि हम जानवर है जज साहब तो जिन्होंने बलात्कार किया वो कौन थे, माफ करें लेकिन हमने अपना जानवर पन नहीं छोड़ा, इन्सानों ने जरूर अपनी इन्सानियत छोड़ दी है''
जज साहब निरूत्तर थे
''जज साहब स्वाभिमान हमारा भी है, हो सके तो आपके संविधान के पन्नों के किसी कोने में हमारे लिए भी जगह ढूंढिये या अबकी ईद पर बकरों की जगह बकरियों को कटने दीजिए