Saturday, 28 July 2018

इंसानियत की लाशें

क्षितिज आॅफिस से निकलने को ही होता है कि शालिनी का फोन आ जाता है
''सुनो थोड़ा जल्दी आना आपका स्पेशल गाजर का हलवा बनाया है''
''हां बाबा मालूम है कल मैंने ही तो गाजर लाकर दी थी बस निकल ही रहा हूॅं''
कहकर क्षितिज ने फोन काट दिया और अपनी बाईक लेकर निकल गया।
आॅफिस से थोड़ी दूर निकला ही था कि एक ट्रक काल बनकर आया और सारे अरमानों को रौंदकर चला गया
थोड़ी देर बाद वहां क्षितिज के साथ और भी कई लाशें बिखरी पड़ी थी
क्षितिज के साथ जो लाशें बिखरी पड़ी थी वो उन लोगों की इंसानियत की थी जो उसे बचाने के बजाय अपने मोबाईल में उसकी अन्तिम सांस निकलने तक उसका विडियो बनाते रहे
पोस्ट मार्टम में क्षितिज की मौत का कारण अधिक रक्त बह जाना बताया गया
वहीं इन्सानियत की मौत का कारण पता नहीं लग सका

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