Saturday, 17 October 2020

नवरात्रि और कन्यापूजन

नवरात्रि और कन्या पूजन
मोहनलाल सुबह से मोहल्ले के 10 घरों के चक्कर काट चुके हैं। लेकिन लाख कोशिश करने के बाद भी 9 कन्याएं नहीं मिल पायी। नवरात्रा के पावन दिन चल रहे हैं। शास्त्रों में भी नवरात्रा के दिनों में कन्या को भोजन करवाने का बड़ा महत्व माना गया है। एक तो मोहल्ले में वैसे भी लड़कियां नहीं है, जो है वो उन्होंने पहले ही कहीं से निमंत्रण ले रखा है। आखिर जब थक हार कर मोहनलाल खाली हाथ घर आ गये तो पत्नी मालती बोली — ''क्या हुआ, कोई लड़की नहीं मिली। ''

''कहां मिली? मोहल्ले में लड़कियां है कहां जो मिलेंगी। जिनके लड़कियां है उन्होंने पहले से निमंत्रण ले रखा है।''

''होगी भी कैसे? जब लड़कियों को पैदा होने दिया जायेगा तभी होंगी ना, खुद तुम्हारे घर में कितनी लड़कियां है? पता है जब मैं दूसरी बार गर्भवती हुई थी और तुम्हे पता चला कि पेट में लड़की है तो तुम्ही ने पैदा नहीं होने दिया। मैं लाख रोयगी, गिड़गिड़ायी लेकिन तुम नहीं पसीजे। अब आदमी जो बोयेगा वहीं तो काटेगा ना। अब आओ फिर से वहीं जहां पिछली बार गये थे।''

मोहनलाल पैर घिसटते हुए फिर शहर के अनाथ आश्रम की ओर चल दिये जहां उन लड़कियों को रखा जाता है जिन्हें जन्मते ही नाले या कूड़ेदान में फैंक दिया गया था।

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