कैसे साहिल पे डूबी थी नाँव दिखा दूं
हारा सबकुछ कैसे वो दाँव दिखा दूं
कामयाबी पे यूँ ही तो पहुँचा नहीं
खून से ये सने मेरे पाँव दिखा दूं
जीतने पूरी दुनिया सिकन्दर चला
जो मिली उसको दो गज ठाँव दिखा दूं
भागते भागते थक गया है अगर
तुझको पीपल की ठंडी छाँव दिखा दूं
रात भर ही भटकता शहर ये तेरा
चैन से सो रहा मेरा गाँव दिखा दूं
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