Saturday, 10 April 2021

मित्र राजेश को श्रद्धांजलि

मेरे प्रिय मित्र राजेश को श्रद्धांजलि स्वरूप 
शब्द पुष्प

दिन अभी ढला न था
अभी तमस हुआ न था
उठ के तुम यूं चल दिये
यूं कोई गया न था

जो तुम्हे ना कह सका
कई बातें वो बाकी थी
तुम अभी कहां चले
मुलाकातें तो बाकी थी

अभी अभी तो कानों में 
घुली थी मीठी बोलियां
अभी तो बाकी थी कई
होली और दिवालियां

अभी हंसी ठिठोली का
दौर बस चला ही था
अभी तो मित्र—प्रेम का
दीप बस जला ही था

पोटली ले भात की
अभी तो मैं चला न था
अभी तलक सुदामा को
कृष्ण भी मिला न था

मिले विधाता गर कहीं
मैं पूछूंगा उसे यहीं
क्यूं तोड़ते इस पुष्प को
कर तेरे कांपे नहीं

क्यूं सफर के बीच ही
छोड़ तुम चले गये
हाय विधि के क्रूरतम
हाथों से छले गये

साथ मेरा छोड़ तुम
कौनसी डगर गये
मैं अकेला रह गया
कूच तुम कर गये

1 comment:

  1. बहुत सुंदर ब्लॉग ऐक से ऐक सुंदर लेख

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