Sunday, 28 April 2013

हां हमने भी दंगों में सब सपने जलते देखे हैं

हमारे गांव में अभी हिन्दू-मुसलमानों के दंगे हुए हैं
दंगा पीडि़तों की दशा को बयां करती कुछ लाईनें हैं, अपनी राय जरूर दें

हां हमने भी दंगों में सब सपने जलते देखे हैं
जिन बागों में कभी खेले थे, उनको भी जलते देखे है।
आंखों में बवण्डर देखे हैं, सीने में खंजर देखे हैं
जहां लगते थे बाजार कभी, वहां मौत के मंजर देखे है।
ख्वाबों के आशियाने अपने सामने जलते देखे है।
और अपनों को ही अपने पेट पे लात मारते देखे हैं
जो कहते थे कि साथ देंगे हम किसी भी संकट में
उनके ही हाथों अपने आशियाने उजड़ते देखे हैं
मासूमों की आंखों में अनसुलझे सवाल देखे हैं
जो देखना ना चाहते थें, दंगों में वो सब देखे हैं

हां हमने भी दंगों में सब सपने जलते देखे हैं
जिन बागों में कभी खेले थे, उनको भी जलते देखे है।

पवन प्रजापति ‘पथिक’

Tuesday, 23 April 2013

मैं तेरी प्यारी सी गुडि़या

मैं तेरी प्यारी सी गुडि़या, आँखों का तारा बापू
कितना खुश होते हो तुम, जब स्कूल से आती हूँ बापू
इक रोज जो मैं ना आ पाई तो ढूँढने चल देना बापू
चप्पा-चप्पा, गलियां-गलियां, सब ओर ढूँढ लेना बापू
गर मिले कोई बस्ता जो फटा, जरा ध्यान देना तुम बापू
बदकिस्मती से वो बस्ता, मेरा ही तो नहीं बापू
गर मिले कोई कपड़ा जो फटा, जरा गौर करना तुम बापू
हाथ में लेके देखना चीथड़े, मेरे ही तो नहीं बापू
गर मिले लाश कोई अधनंगी, कुचली-कुचली, रौंदी-रौंदी
जरा दिल पे पत्थर रख लेना वो तेरी गुडि़या तो नहीं बापू
गर जो ऐसा हो जाए मेरी लाश पे ना रोना बापू
मेरी माँ को जरा सम्भाल लेना वो सह ना पाएगी बापू
तुम भैया को समझा देना, कि गुडि़या 
ई है दूर देश
जहां मिलते नहीं कदमों के निशां, कोई लौट के ना आता बापू

मैं तेरी प्यारी सी गुडि़या, आँखों का तारा बापू

पवन प्रजापति ‘पथिक’

Monday, 22 April 2013

मुझे ना आना तेरे देश री मैया


मुझे ना आना तेरे देश री मैया
तेरे देश में डर मुझे लगता है
तेरे देश में पैदा होने से
मर जाना अच्छा लगता है
तेरे देश में इन्सा बसते नहीं
हर नुक्कड़ पे दरिन्दे बसते हैं
और नारी की इज्जत को यहां
सरे आम लूटा करते हैं।
जो तेरे देश मैं आऊँ तो
क्या महफूज मुझे रख पाओगी?
और दरिन्दों के हाथो
लुटने से बचा तुम पाओगी
गर लुटे द्रोपदी एक कोई
तो कृष्ण बचा ले जाएगा
हर नुक्कड़ पे लुटती द्रोपदी है
किस-किस को कृष्ण बचाएगा
मैया तेरे देश में मासूमों को
भी बख्शा नहीं जाता है
और बेशर्मी की हद देखो
उनको भी लूटा जाता है
मैया तेरे देश की हालत पे
सिर शर्म से झुकता जाता है
जहां नारी पूजी जाती है
नारी को लूटा जाता है
मुझे ना आना तेरे देश री मैया
तेरे देश में डर मुझे लगता है
तेरे देश में पैदा होने से
मर जाना अच्छा लगता है

पवन प्रजापति ‘पथिक’