मैं तेरी प्यारी सी गुडि़या, आँखों का तारा बापू
कितना खुश होते हो तुम, जब स्कूल से आती हूँ बापू
इक रोज जो मैं ना आ पाई तो ढूँढने चल देना बापू
चप्पा-चप्पा, गलियां-गलियां, सब ओर ढूँढ लेना बापू
गर मिले कोई बस्ता जो फटा, जरा ध्यान देना तुम बापू
बदकिस्मती से वो बस्ता, मेरा ही तो नहीं बापू
गर मिले कोई कपड़ा जो फटा, जरा गौर करना तुम बापू
हाथ में लेके देखना चीथड़े, मेरे ही तो नहीं बापू
गर मिले लाश कोई अधनंगी, कुचली-कुचली, रौंदी-रौंदी
जरा दिल पे पत्थर रख लेना वो तेरी गुडि़या तो नहीं बापू
गर जो ऐसा हो जाए मेरी लाश पे ना रोना बापू
मेरी माँ को जरा सम्भाल लेना वो सह ना पाएगी बापू
तुम भैया को समझा देना, कि गुडि़या गई है दूर देश
जहां मिलते नहीं कदमों के निशां, कोई लौट के ना आता बापू
मैं तेरी प्यारी सी गुडि़या, आँखों का तारा बापू
पवन प्रजापति ‘पथिक’
कितना खुश होते हो तुम, जब स्कूल से आती हूँ बापू
इक रोज जो मैं ना आ पाई तो ढूँढने चल देना बापू
चप्पा-चप्पा, गलियां-गलियां, सब ओर ढूँढ लेना बापू
गर मिले कोई बस्ता जो फटा, जरा ध्यान देना तुम बापू
बदकिस्मती से वो बस्ता, मेरा ही तो नहीं बापू
गर मिले कोई कपड़ा जो फटा, जरा गौर करना तुम बापू
हाथ में लेके देखना चीथड़े, मेरे ही तो नहीं बापू
गर मिले लाश कोई अधनंगी, कुचली-कुचली, रौंदी-रौंदी
जरा दिल पे पत्थर रख लेना वो तेरी गुडि़या तो नहीं बापू
गर जो ऐसा हो जाए मेरी लाश पे ना रोना बापू
मेरी माँ को जरा सम्भाल लेना वो सह ना पाएगी बापू
तुम भैया को समझा देना, कि गुडि़या गई है दूर देश
जहां मिलते नहीं कदमों के निशां, कोई लौट के ना आता बापू
मैं तेरी प्यारी सी गुडि़या, आँखों का तारा बापू
पवन प्रजापति ‘पथिक’
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