Thursday, 25 October 2018

क्या नाम दूं

अच्छा एक बात तो बताओ !

तुम तो कहती थी 
कि तुम्हे 
पहली नजर में ही 
मुझसे प्रेम हो गया था
गर वो प्रेम था 
तो फिर 
ये जो तुम 
मेरे मांगने से पहले ही 
मेरे हाथ में 
चश्मा पकड़ा देती हो,
मेरे खड़ा होने से पहले ही 
हाथ में छड़ी थमा देती हो
मेरे दवाई लेना भूल जाने पर
बच्चों की तरह 
डांट दिया करती हो
सुबह से शाम तक 
मेरी बकवास में भी 
हां में हां मिलाती रहती हो
गर थोड़ी देर ना मिलूं 
तो परेशान हो जाती हो
रात को कई बार उठकर
मुझे सम्भालती हो
ये जो तुम्हारी आंखों में
मुझे खो देने का डर है
ये जो तुमने मुझे अपनी
रूह तक में बसा रखा है
फिर इसे

क्या नाम दूं

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