लघु कथा : लायक और नालायक
गोरधनलाल के दो लड़के थे — घनश्याम और गिरधारी, घनश्याम शुरु से पढ़ाई में अव्वल था तो गिरधारी के लिये पढ़ाई लिखाई बस की बात न थी। गोरधन शुरु से चाहता था कि उसके दोनों बच्चे अच्छा पढ़ लिख जाये और अच्छी नौकरी पा जायें क्योंकि खेती में तो अब कुछ गुजर बसर होता न था, लेकिन गिरधारी की रूचि पढ़ाई लिखाई में न थी। गोरधन खूब डांटता उसको कई बार तो पिटाई भी की लेकिन पिटाई से भला पढ़ाई कहां आती। गोरधन की नाराजगी का आलम ये था कि वो उसको 'नालायक' कहकर ही पुकारता। घनश्याम को पिता का प्यार मिलता तो गिरधारी को डांट और फटकार। गोरधन पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बन गया, बहुत बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनी में मैनेजर का पद मिल गया और अब बड़े शहर में रहता है, शहर की ही पढ़ी लिखी लड़की से प्रेम विवाह भी कर लिया है। गिरधारी ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी अब गांव में ही खेती बाड़ी करता है और पशु चराता है।
इन बातों अब काफी समय बीत गया है
गोरधन अब बूढ़ा हो गया है। आजकल बहुत बीमार है और खटिया पकड़ ली है। 'लायक' बेटा घनश्याम शहर में रहता है। वर्ष में एकाध बार आकर मिल जाता है। बड़ी कम्पनी में अफसर है सो ज्यादा समय नहीं मिलता है, वहीं 'नालायक' बेटा गिरधारी खेती का काम भी करता है और पिता की सेवा भी। गोरधन की अनपढ़ पत्नी भी अपने ससुर की पिता समझकर सेवा करती है