लघु कथा : राखी
पांच वर्ष की चमकी आज बेहद खुश थी। आज वो पहली बार किसी को राखी बांधने वाली थी वो भी अपने पड़ौस में रहने वाले रघु को । चमकी अपने माता—पिता की इकलौती सन्तान थी। उसका अपना कोई भाई न था। राखी के दिन हर लड़की को राखी बांधते देख उसका भी मन होता था लेकिन अपना कोई भाई नहीं होने के मन मसोस कर रह जाती। इस राखी वो रघु को राखी बांधने की जिद कर बैठी तो मॉं ने भी हां कर दिया। रघु यूं तो 20 बरस का था लेकिन चमकी के लिये हमेशा चॉकलेट, कुरकुरे आईसक्रीम वगैरह लाया करता था । चमकी सुबह तैयार अपनी नई फ्रॉक में राखी ठूंस कर रघु को राखी बांधने चल दी।
चमकी को गये हुए 3 घण्टे से ज्यादा बीत गये थे लेकिन अभी तक लौटी नहीं। चमकी के माता — पिता को चिन्ता होने लगी। दोनों ने पूरा मोहल्ला छान मारा लेकिन चमकी का कहीं कोई पता नहीं चला। रघु की भी कोई खबर न थी। दोनों का रो — रो कर बुरा हाल था। रात बीत गयी लेकिन चमकी नहीं लौटी।
सुबह अखबार के एक कोने में खबर छपी — ''शहर में पांच वर्ष की मासूस की दुष्कर्म के बाद हत्या'' साथ में एक फोटो भी छपी थी जिसमें एक बच्ची के शव पास राखी के टुकड़े बिखरे पड़े थे।
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