Saturday, 10 August 2019

आदमी और कुत्ते

लघु कथा : कुत्ते और आदमी

हमेशा की तरह आज भी अनुपमा कोचिंग क्लास अटेण्ड कर घर के लिये निकल गयी। ये उसका हमेशा का रूटीन था लेकिन आज फर्क ये था कि उसकी सहेली स्नेहा साथ नहीं थी। उसको बुखार था तो आज अनुपमा को अकेले ही आना पड़ा। कुछ देर इन्तजार के बाद उसे बस मिल गयी। बैग कांधे पर टांगे अनुपमा खिड़की के पास वाली एक खाली सीट पर जाकर बैठ गयी।  शहर की इमारतों को खिड़की से पीछे भागते देख रही अनुपमा को पता ही नहीं चला कब उसका स्टेशन आ गया। यदि बस का परिचालक ना बताता तो  अनुपमा ख्यालों में खोयी आगे ही निकल गयी होती। बस से उतरकर अनुपमा घर की ओर चल दी। स्टेशन से अनुपमा का घर थोड़ी दूर था। गरमी की दोपहरी थी गली भी बिल्कुल सुनसान थी। अनुपमा तेज कदमों से घर की ओर जा ही रही थी कि अचानक एक साया उसका रास्ता रोक लेता है। अनुपमा ने देखा — अरे ये तो चन्दन है, पूरे मोहल्ले में बदनाम है, आज शायद अकेली देखकर उसने अनुपमा का रास्ता रोक लिया। चन्दन अनुपमा से बदतमीजी करने लगता है। अनुपमा उससे मिन्नते करती है लेकिन वो नहीं मानता। चन्दन अनुपमा से बदतमीजी कर ही रहा होता है कि तभी कहीं से दो कुत्ते भौंकते हुए आते हैं जो पता नहीं क्यों चन्दन के पीछे पड़ जाते हैं। कुत्तों को अपने पीछे पड़ा देख चन्दन को वहां से भागना पड़ता है।

अनुपमा अब सुरक्षित थी मन ही मन 'कुत्तों' को धन्यवाद देते हुए घर की ओर चल दी

आखिरकार 'कुत्तों' ने उसे 'आदमी' से बचाया जो था।

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