पवन प्रजापति
Sunday, 23 July 2017
जरा खुल के इसे उड़ लेने दो
जरा खुल के इसे उड़ लेने दो
कल को ये परिंदा हो न हो
थक के जरा सो जाओ यहाँ
कल को ये कंधा हो न हो
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