पवन प्रजापति
Friday, 15 September 2017
इन आँखों की और कोई चाह नही
इन आँखों की और कोई चाह नही
बन के ख्वाब तू इनमे समाती रहे
बन के बांसुरी होठो को छू के सनम
मेरी सांसो से तू गीत गाती रहे
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