सभी नागों को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं। आज नागों का दिन है, आज विष वमन करने वाले नागों को भी दूध पिलाया जायगा, और सिर्फ आज ही पिलाया जायेगा। नाग भी ये बात भली भांति जानते हैं कि वह कल इन लोगों को दिख गया तो यही दूध पिलाने वाले लोग लाठी से पीट — पीट कर पिया हुआ दूध खून में से वापस निकाल लेंगे। लिहाजा वह कल सावधान हो जायेगा।
हमारे देश में नागों को देवता का दर्जा मिला हुआ है। बॉलिवुड ने भी नागों पर कई फिल्में बनाकर उन्हें सम्मान दिया। श्रीदेवी ने तो नगीना में 'इच्छाधारी नागिन' का कालजयी किरदार निभाया था। लेकिन समय के साथ ये इच्छा धारी नाग फिल्मों में से निकल कर अलग — अलग रूप धर कर इन्सानों के बीच छुप गये। इन्सान के रूप में होने के कारण इनको पहचानना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इनकी गतिविधियों पर ध्यान दें तो इनको पहचानने में देर नहीं लगेगी। ऐसे सॉंप जो पहले आस्तीनों में छुपे रहते थे वे सांप आजकल इंसान का रूप धरकर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं — ''वे भारत तेरे टुकड़े होंगे'', ''भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी'' जैसे नारे लगाते मिल जायेंगे। इन सॉंपों को देश विरोधी गतिविधियों में ज्यादा आनन्द आता हैं जो कि स्वाभाविक है क्योंकि वे पहले आस्तीन के ही सॉंप थे। कुछ सॉंप जो ज्यादा जहरीले थे वे सियासत में चले गये। वे अब मौखिक विषवमन करते हैं। इस रूप में उनके विष की मारक क्षमता भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गयी है। पहले उनके डसने से जहॉं सिर्फ एक व्यक्ति की मृत्यु होती थी वहीं अब उनके विष वमन से हजारों लाखों लोग मारे जाते हैं। कुछ नाग मीडिया में चले गये और पत्रकार बन गये तो कुछ ने मजहब व जिहाद की घुट्टी पिला नये जहरीले सॉंप बनाने शुरू कर दिये। कुल मिलाकर कहना ये है कि ऐसे सॉंपों की पहचान कीजिये और मानव समाज में से ऐसे सॉंपों को अलग कीजिये क्योंकि कोरोना की वेक्सीन शायद मिल जाये लेकिन इनकी वेक्सीन मिलना शायद असम्भव है।