पवन प्रजापति
Tuesday, 21 July 2020
अब शबनम की बूँद बहुत है
तेरे सिवा तो लोग बहुत है
पर तन्हा माहौल बहुत है
इन राहों में मिला करो मत
इन राहों में लोग बहुत है
अब इनको भी जेल भेज दो
सत्ता में भी चोर बहुत है
जीवन हो गर भगतसिंह सा
जीने को चंद रोज बहुत हैं
इतने सावन बरस चुके की
अब शबनम की बूँद बहुत है
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