Tuesday, 21 July 2020

मानो वो कोई गुजरा वक्त हो गया था

फिर यादों के शहर में मेला सा हो गया था
उनकी गली से गुजरे इक अरसा हो गया था

पत्थर भी हाय उस दम शर्मीन्दगी से पिघले
देखा जो रोटियों को बच्चा वो रो गया था

वो अब भी तेरी गलियों की खाक छानता है
इक दिन तेरी गली में दिल उसका खो गया था

मॉं के उठाये भी अब वो बेटा ना उठेगा
ओढ़ के तिरंगा वो लाल सो गया था

वो छोड़ के गया तो फिर लौट के ना आया
मानो वो कोई गुजरा वक्त हो गया था

No comments:

Post a Comment