मेरी कलम नहीं जो
दरबारों के आगे नाची हो
जिसकी स्याही राजनीति के
बाजारों से आती हो
मैं पैसों के लालच में कभी
शब्द बेच नहीं सकता हूँ
सत्ता को खुश करने झूठे
लेख नहीं लिख सकता हूँ
दरबारों के आगे नाची हो
जिसकी स्याही राजनीति के
बाजारों से आती हो
मैं पैसों के लालच में कभी
शब्द बेच नहीं सकता हूँ
सत्ता को खुश करने झूठे
लेख नहीं लिख सकता हूँ
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