पिताजी की 40 वर्षों की निःस्वार्थ राजकीय सेवा से सेवानिवृति के उपलक्ष में कुछ लाईनें
JUNE 2015
इक दौर खत्म होने को है
इक दौर शुरु हुआ होगा
इक दिन बीता इक सांझ ढली
फिर सूरज उग आया होगा
छोड़ चले जब चार दीवारी
कदम भी ठिठके तो होंगे
कुछ कदम चले भी तो होंगे
कुछ कदम रूके भी तो हांगे
साथियों के पुष्पाहारों ने
सम्मान बढ़ाया भी होगा
देख आत्मीयता के वो पल
गौरव का भान हुआ होगा
अपनों का स्नेह भी तो
हृदय में समाया ना होगा
और स्वजनों के सम्मान से
नेत्रों मे जल आया होगा
इक दौर खत्म होने को है
इक दौर शुरु हुआ होगा
इक दिन बीता इक सांझ ढली
फिर सूरज उग आया होगा
पवन प्रजापति ‘पथिक’
इक दौर खत्म होने को है
इक दौर शुरु हुआ होगा
इक दिन बीता इक सांझ ढली
फिर सूरज उग आया होगा
छोड़ चले जब चार दीवारी
कदम भी ठिठके तो होंगे
कुछ कदम चले भी तो होंगे
कुछ कदम रूके भी तो हांगे
साथियों के पुष्पाहारों ने
सम्मान बढ़ाया भी होगा
देख आत्मीयता के वो पल
गौरव का भान हुआ होगा
अपनों का स्नेह भी तो
हृदय में समाया ना होगा
और स्वजनों के सम्मान से
नेत्रों मे जल आया होगा
इक दौर खत्म होने को है
इक दौर शुरु हुआ होगा
इक दिन बीता इक सांझ ढली
फिर सूरज उग आया होगा
पवन प्रजापति ‘पथिक’