क्यूं मौन है तू आज कुछ बोलता क्यूं नहीं
ये आज नेत्र है सजल क्यूं अश्रु रोकता नहीं
क्या तुम्हारे धैर्य की कोई सीमा ही नहीं
जो रक्त है शिराओं में तो खौलता क्यूं नहीं
स्वरचित
ये आज नेत्र है सजल क्यूं अश्रु रोकता नहीं
क्या तुम्हारे धैर्य की कोई सीमा ही नहीं
जो रक्त है शिराओं में तो खौलता क्यूं नहीं
स्वरचित
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