लघु कथा : मजदूर दिवस
शहर के बिल्कुल पास निर्माणधीन सरकारी कॉलोनी में आज चहल पहल कुछ ज्यादा थी। हमेशा कड़ी मेहनत करने वाले मजदूर आज अवकाश पर थे। सजे धजे होने के बाद भी उनके चेहरे पर वो तेज न दिखायी पड़ता था जो कड़ी मेहनत के बाद उनके धूल सने चेहरे पर हुआ करता था। आज मजदूर दिवस था और मंत्री महोदय आज मजदूरों से मिलने आ रहे थे। मंत्रीजी के लिये भव्य स्टेज का निर्माण किया जा चुका था। लोग मंत्रीजी के स्वागत के लिये हाथों में फूल मालाएं लेकर खड़े थे। परम्परानुसार मंत्रीजी नियत समय से ठीक 2 घण्टा विलम्ब से समारोह में पहुच गये। लोगों ने मन्त्री महोदय को फूल मालाओं से लाद दिया। मंच पर भव्य स्वागत के पश्चात् मंत्री महोदय ने अपना उद्बोधन प्रारम्भ किया।
''मेरे मजदूर भाईयों! आप लोग ही देश की असली ताकत हैं। आपके योगदान के बिना देश विकास की कभी कल्पना नहीं कर सकता। आज हम देश में चारों ओर शानदार सड़कें, ऊंची — ऊंची ईमारतें, शानदार पुल देख रहे हैं इस चकाचौंध के पीछे आपके मेहनत छिपी है। आप सचमुच महान हैं।''
मंत्री महोदय ने मजदूरों के लिये लम्बा चौड़ा भाषण दिया। मजदूरों के कल्याण के लिये उन्होंन मंच से कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं भी की। मंत्रीजी का भाषण सुन मजदूर भाव विभोर हो उठे। उन्हें लगा कि ये नेताजी सचमुच महान हैं जो उनका उद्धार करने के लिये आयें हैं। भाषण के पश्चात् मंत्रीजी मजदूरों से जाकर मिले एवं उनकी समस्याएं पूछी। इस दौरान दो — चार मजदूर नेता जो अपनी समस्याओं को लेकर मंत्रीजी से मिलने जा रहे थे उन्हें सुरक्षा कारणों से रोक लिया गया। इस बीच मंत्रीजी मजदूरों के साथ फोटो खिंचवाकर उन पर एक और उपकार कर चुके थे।
दूसरे दिन वही फोटो अखबारों में छपी जिसमें लिखा था कि मंत्रीजी ने मजदूरों से मिलकर उनकी समस्याओं का निवारण किया। मजदूरों के लिये की गयी घोषणाओं की सूची मंत्रीजी ने अगले वर्ष 'मजदूर दिवस' के लिये सम्भाल कर रखली । उधर महीने के अन्त में मजदूरों को पता चलता है कि उनकी एक दिन की मजदूरी काट ली गयी थी।
शहर के बिल्कुल पास निर्माणधीन सरकारी कॉलोनी में आज चहल पहल कुछ ज्यादा थी। हमेशा कड़ी मेहनत करने वाले मजदूर आज अवकाश पर थे। सजे धजे होने के बाद भी उनके चेहरे पर वो तेज न दिखायी पड़ता था जो कड़ी मेहनत के बाद उनके धूल सने चेहरे पर हुआ करता था। आज मजदूर दिवस था और मंत्री महोदय आज मजदूरों से मिलने आ रहे थे। मंत्रीजी के लिये भव्य स्टेज का निर्माण किया जा चुका था। लोग मंत्रीजी के स्वागत के लिये हाथों में फूल मालाएं लेकर खड़े थे। परम्परानुसार मंत्रीजी नियत समय से ठीक 2 घण्टा विलम्ब से समारोह में पहुच गये। लोगों ने मन्त्री महोदय को फूल मालाओं से लाद दिया। मंच पर भव्य स्वागत के पश्चात् मंत्री महोदय ने अपना उद्बोधन प्रारम्भ किया।
''मेरे मजदूर भाईयों! आप लोग ही देश की असली ताकत हैं। आपके योगदान के बिना देश विकास की कभी कल्पना नहीं कर सकता। आज हम देश में चारों ओर शानदार सड़कें, ऊंची — ऊंची ईमारतें, शानदार पुल देख रहे हैं इस चकाचौंध के पीछे आपके मेहनत छिपी है। आप सचमुच महान हैं।''
मंत्री महोदय ने मजदूरों के लिये लम्बा चौड़ा भाषण दिया। मजदूरों के कल्याण के लिये उन्होंन मंच से कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं भी की। मंत्रीजी का भाषण सुन मजदूर भाव विभोर हो उठे। उन्हें लगा कि ये नेताजी सचमुच महान हैं जो उनका उद्धार करने के लिये आयें हैं। भाषण के पश्चात् मंत्रीजी मजदूरों से जाकर मिले एवं उनकी समस्याएं पूछी। इस दौरान दो — चार मजदूर नेता जो अपनी समस्याओं को लेकर मंत्रीजी से मिलने जा रहे थे उन्हें सुरक्षा कारणों से रोक लिया गया। इस बीच मंत्रीजी मजदूरों के साथ फोटो खिंचवाकर उन पर एक और उपकार कर चुके थे।
दूसरे दिन वही फोटो अखबारों में छपी जिसमें लिखा था कि मंत्रीजी ने मजदूरों से मिलकर उनकी समस्याओं का निवारण किया। मजदूरों के लिये की गयी घोषणाओं की सूची मंत्रीजी ने अगले वर्ष 'मजदूर दिवस' के लिये सम्भाल कर रखली । उधर महीने के अन्त में मजदूरों को पता चलता है कि उनकी एक दिन की मजदूरी काट ली गयी थी।