लघुकथा :आधुनिकता से अंधाधुनिकता
धस मोनिका शिक्षिका थी। उनका पालन पोषण शहर में हुआ था। पश्चिमी सभ्यता से बहुत प्रभावित थी। अबकी बार उनका तबादला रामपुर कर दिया गया था जो उनके शहर से काफी दूर था। लिहाजा मिस मोनिका के पास अनमने मन से ही सही रामपुर बसने के सिवाय कोई रास्ता न था। आज वे अपने लिये किराये का घर देखने आई थी। पाश्चात्य परिधान लपेटे मोनिका जब रामपुर पहुंची तो कमोबेश हर किसी की नजर उसी पर थी। मेले या हाट से जो कपड़े छोटे बच्चों के लिये लाते हैं कमोबेश वैसे ही वस्त्रों में युवती को देख लोग भी चकित थे।
बहुत देखने पर मोनिका को एक मकान पसन्द आया। मकान मालकिन रेवती उसे पूरा मकान दिखा रही थी। 'आधुनिकता' की साधक मोनिका को ग्रामीण परिवेश पसन्द नहीं था लेकिन विवशता थी। वे देखते — देखते बातों ही बातों में बोली — ''शहर की आधुनिकता की तुलना में गांवों में कितना पिछड़ा पन है, यहां आधुनिकता को हेय दृष्टि से देखा जाता है, सुन्दरता का कोई मोल नहीं है। अब तुम ही बताओ, सुन्दरता को यदि वस्त्रों से ढक लिया तो भला सुन्दरता का क्या मतलब? यदि ईश्वर ने हमें सौन्दर्य दिया है तो हम क्यों ना दिखाएं।''
बहुत देखने पर मोनिका को एक मकान पसन्द आया। मकान मालकिन रेवती उसे पूरा मकान दिखा रही थी। 'आधुनिकता' की साधक मोनिका को ग्रामीण परिवेश पसन्द नहीं था लेकिन विवशता थी। वे देखते — देखते बातों ही बातों में बोली — ''शहर की आधुनिकता की तुलना में गांवों में कितना पिछड़ा पन है, यहां आधुनिकता को हेय दृष्टि से देखा जाता है, सुन्दरता का कोई मोल नहीं है। अब तुम ही बताओ, सुन्दरता को यदि वस्त्रों से ढक लिया तो भला सुन्दरता का क्या मतलब? यदि ईश्वर ने हमें सौन्दर्य दिया है तो हम क्यों ना दिखाएं।''
मानिका जहां अपनी आधुनिकता का बखान करती जा रही थी वहीं रेवती बिना उत्तर दिये मकान बता रही थी। सहसा रेवती एक दरवाजे के सामने रूकी और बोली —
''मैडम ये आपका बाथरूम है, इसकी खिड़की बाहर की तरफ खुलती है, और हां अपने आप को 'आधनिक' से ' अन्धाधुनिक बचाने के लिये नहाते समय इस खिड़की को जरूर बन्द रखियेगा''
''मैडम ये आपका बाथरूम है, इसकी खिड़की बाहर की तरफ खुलती है, और हां अपने आप को 'आधनिक' से ' अन्धाधुनिक बचाने के लिये नहाते समय इस खिड़की को जरूर बन्द रखियेगा''
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