लघु कथा
ये लॉक—डाउन कभी ना खुले
कपिल बालकनी पर खड़ा शहर की सूनी सड़कों को ताक रहा था। कभी न थमने वाले शहर में आज मरघट का सन्नाटा पसरा हुआ था। दिन भर इन्सानों की चहलकदमी से आबाद रहने वाली सड़कों पर आज कुत्ते निश्चिंत होकर दौड़ रहे थे। आज उन्हें किसी गाड़ी के नीचे कुचले जाने का भय भी न था। लॉक डाउन ने जैसे जीवन की गति को थाम कर रख दिया था। अन्यथा कपिल को इतना समय कहां था। भाग दौड़ भरी जिन्दगी में कपिल को पता ही नहीं चला कि कब उसकी शादी को पांच साल बीत गये। सुबह आॅफिस जाना और देर रात तक लौटना, भोजन करना और सो जाना। सुबह होते ही फिर वही क्रम, कभी — कभी तो उसे लगता कि वो इंसान नहीं बल्कि मशीन बनकर रह गया है। उसने बालकनी ने नजरें हटाकर घर में दौड़ाई। राधा हमेशा की तरह अपने काम में लगी हुई थी। उसके लिये तो लॉकडाउन के कोई मायने ही नहीं थे। शादी से पहले कितना खुश थी वो। कितने सपने देख रखे थे उसने। शिमला — मनाली घूमने का प्लान भी बना रखा था। लेकिन कपिल अपनी व्यस्तता के चलते कभी उसे समय ही नहीं दे पाया। राधा ने भी कभी शिकायत नहीं की। कपिल को याद नहीं कि इन पांच सालों के दौरान वे दोनों कभी प्रेम से बतियाये हों, जैसे वो शादी से पहले किया करते थे। वो स्मृतियों से बाहर आया। आज राधा उसे हमेशा से सुन्दर लग रही थी । कपिल न जाने ऐसे कितने पल गंवा चुका था। लेकिन अब वो उसे नहीं गंवाना चाहता था। उसने आगे बढ़कर राधा का हाथ अपने हाथों में थाम लिया । आँखें — आँखों से टकराई मानों उलाहना दे रही हो कि 'अब तक कहां थे'। कपिल ने राधा को सीने से लगा लिया। राधा मन ही मन सोच रही थी — काश ये 'लॉक—डाउन' कभी ना खुले।
ये लॉक—डाउन कभी ना खुले
कपिल बालकनी पर खड़ा शहर की सूनी सड़कों को ताक रहा था। कभी न थमने वाले शहर में आज मरघट का सन्नाटा पसरा हुआ था। दिन भर इन्सानों की चहलकदमी से आबाद रहने वाली सड़कों पर आज कुत्ते निश्चिंत होकर दौड़ रहे थे। आज उन्हें किसी गाड़ी के नीचे कुचले जाने का भय भी न था। लॉक डाउन ने जैसे जीवन की गति को थाम कर रख दिया था। अन्यथा कपिल को इतना समय कहां था। भाग दौड़ भरी जिन्दगी में कपिल को पता ही नहीं चला कि कब उसकी शादी को पांच साल बीत गये। सुबह आॅफिस जाना और देर रात तक लौटना, भोजन करना और सो जाना। सुबह होते ही फिर वही क्रम, कभी — कभी तो उसे लगता कि वो इंसान नहीं बल्कि मशीन बनकर रह गया है। उसने बालकनी ने नजरें हटाकर घर में दौड़ाई। राधा हमेशा की तरह अपने काम में लगी हुई थी। उसके लिये तो लॉकडाउन के कोई मायने ही नहीं थे। शादी से पहले कितना खुश थी वो। कितने सपने देख रखे थे उसने। शिमला — मनाली घूमने का प्लान भी बना रखा था। लेकिन कपिल अपनी व्यस्तता के चलते कभी उसे समय ही नहीं दे पाया। राधा ने भी कभी शिकायत नहीं की। कपिल को याद नहीं कि इन पांच सालों के दौरान वे दोनों कभी प्रेम से बतियाये हों, जैसे वो शादी से पहले किया करते थे। वो स्मृतियों से बाहर आया। आज राधा उसे हमेशा से सुन्दर लग रही थी । कपिल न जाने ऐसे कितने पल गंवा चुका था। लेकिन अब वो उसे नहीं गंवाना चाहता था। उसने आगे बढ़कर राधा का हाथ अपने हाथों में थाम लिया । आँखें — आँखों से टकराई मानों उलाहना दे रही हो कि 'अब तक कहां थे'। कपिल ने राधा को सीने से लगा लिया। राधा मन ही मन सोच रही थी — काश ये 'लॉक—डाउन' कभी ना खुले।
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