मैं चला जाउंगा तेरे दर से अभी
तू कह तो सही ये शहर छोड़ दे
इन आंखों को तेरी तलब ही ना हो
गर तू प्यार भरी वो नजर छोड़ दे
मैं पुकारूं जो दिल से तड़प जाए तू
मेरी आंहों में इतना असर छोड़ दे
मैं दीवाना सही विषधर तो नहीं
जो कि पी के सुधा फिर जहर छोड़ दे
स्वरचित
तू कह तो सही ये शहर छोड़ दे
इन आंखों को तेरी तलब ही ना हो
गर तू प्यार भरी वो नजर छोड़ दे
मैं पुकारूं जो दिल से तड़प जाए तू
मेरी आंहों में इतना असर छोड़ दे
मैं दीवाना सही विषधर तो नहीं
जो कि पी के सुधा फिर जहर छोड़ दे
स्वरचित
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