Sunday, 27 August 2017

मैं चला जाउंगा तेरे दर से अभी

मैं चला जाउंगा तेरे दर से अभी
तू कह तो सही ये शहर छोड़ दे

इन आंखों को तेरी तलब ही ना हो
गर तू प्यार भरी वो नजर छोड़ दे

मैं पुकारूं जो दिल से तड़प जाए तू
मेरी आंहों में इतना असर छोड़ दे

मैं दीवाना सही विषधर तो नहीं
जो कि पी के सुधा फिर जहर छोड़ दे

स्वरचित

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