गले लगाकर छोटे को मैं जाने कब से सोच रही हूं
क्या तुझको महफूज रखूंगी जब मैं खुद महफूज नहीं हूं
मांस नोचती इस दुनिया में क्यूं भेजा था हे विधाता
क्या मैं छोटे को बचाऊं जब मैं खुद ही मर रही हूं
तू तो कहता था दुनिया में औरत पूजी जाती है
फिर चैराहों पे क्यू सीता सावित्री यूं लुटती है
हर इक नजर को जाने क्यूं माँस का टुकड़ा मैं दिखती हूँ
इक दुलार भरी नजर को जाने कब से मैं तरसती हूं
तमाशबीनों की दुनिया में किसको अब आवाज लगाउं
बेशर्मों की भीड़ से कैसे शर्मो हया की आस लगाउं
औरत की अस्मत जो लूटे क्यूं उसको इन्सान कहा है
मेरे जिन्दा जल जाने को जग ने क्यूं बलिदान कहा है
धर्म की मोटी बातें करने वालों को क्यूं लाज ना आए
जिस नारी से पैदा होते उससे भी वो बाज ना आए
विश्व गुरु बनने से पहले बेटी की रक्षा कर लेना
गर जो ऐसा कर ना सको तो शर्म से जाकर डूब मरना
‘पथिक’
क्या तुझको महफूज रखूंगी जब मैं खुद महफूज नहीं हूं
मांस नोचती इस दुनिया में क्यूं भेजा था हे विधाता
क्या मैं छोटे को बचाऊं जब मैं खुद ही मर रही हूं
तू तो कहता था दुनिया में औरत पूजी जाती है
फिर चैराहों पे क्यू सीता सावित्री यूं लुटती है
हर इक नजर को जाने क्यूं माँस का टुकड़ा मैं दिखती हूँ
इक दुलार भरी नजर को जाने कब से मैं तरसती हूं
तमाशबीनों की दुनिया में किसको अब आवाज लगाउं
बेशर्मों की भीड़ से कैसे शर्मो हया की आस लगाउं
औरत की अस्मत जो लूटे क्यूं उसको इन्सान कहा है
मेरे जिन्दा जल जाने को जग ने क्यूं बलिदान कहा है
धर्म की मोटी बातें करने वालों को क्यूं लाज ना आए
जिस नारी से पैदा होते उससे भी वो बाज ना आए
विश्व गुरु बनने से पहले बेटी की रक्षा कर लेना
गर जो ऐसा कर ना सको तो शर्म से जाकर डूब मरना
‘पथिक’
