जो वादे लिए थे मैंने तुमसे
क्या उन पर कभी तुम चलते हो
फिर बोलो किस मुँह से मेरा
जन्म दिवस मनाते हो
वो माँ को छलनी करते हैं
ये देख हृदय अब रोता है
पर तुम इतने क्यूँ कायर हो
क्या तुम्हे दर्द नहीं होता है
यदि माँ कि रक्षा कर ना सको
तो फिर ये इतना दिखावा कयूं
यदि मेरे पथ पर चल ना सको
तो जन्म दिवस भी मनाना क्यूं
कहाँ गया वो खून जो हरदम
रण को आतुर रहता था
जिनकी हुंकार से ही डरकर
सूरज छुप जाया करता था
खुद को भगत सिंह का वंशज
कहना अब तुम बन्द करो
तुम तो कायर हो ही लेकिन
ना नाम मेरा बदनाम करो
काश कि सम्भव होता तो
मैं फिर से हथियार उठा लेता
जिन्दा न रहता गद्दार कोई
और माँ का न ये हाल होता
‘पथिक’
क्या उन पर कभी तुम चलते हो
फिर बोलो किस मुँह से मेरा
जन्म दिवस मनाते हो
वो माँ को छलनी करते हैं
ये देख हृदय अब रोता है
पर तुम इतने क्यूँ कायर हो
क्या तुम्हे दर्द नहीं होता है
यदि माँ कि रक्षा कर ना सको
तो फिर ये इतना दिखावा कयूं
यदि मेरे पथ पर चल ना सको
तो जन्म दिवस भी मनाना क्यूं
कहाँ गया वो खून जो हरदम
रण को आतुर रहता था
जिनकी हुंकार से ही डरकर
सूरज छुप जाया करता था
खुद को भगत सिंह का वंशज
कहना अब तुम बन्द करो
तुम तो कायर हो ही लेकिन
ना नाम मेरा बदनाम करो
काश कि सम्भव होता तो
मैं फिर से हथियार उठा लेता
जिन्दा न रहता गद्दार कोई
और माँ का न ये हाल होता
‘पथिक’




