Tuesday, 11 September 2012


नीचे लिखी पंक्तियों में छुपी वेदना मेरी वास्तविक वेदना है जो मैंने मेरे किसी अपने के लिए लिखी है, किसी की प्रशंषा पाने के लिए नहीं,

मैं दम साधे बैठा हु, की काश कभी वो मुस्काए,
भूले से ही सही लेकिन, चेहरे पे हंसी तो आ जाये
यूँ उसको तडपते हुए, मैं देख नहीं पाता हु
सांस अटकती उसकी है, लेकिन मैं मर जाता हु
किस्मत मैं तेरे प्यारे, क्या कभी कोई मुस्कान नहीं
देख तुझे मैं सोच रहा, क्या कही कोई भगवान नहीं
मैं दम भर तो जीता हु, माँ तेरी पल पल मरती है
तू काश कभी तो मुस्काए, बस झूठी आस लगाती है
काश की ये मुमकिन होता, दुःख तेरे सारे मैं ले पाता
देख तेरी मुस्कान को फिर, मैं जीवन अपना जी लेता
ये भी मुझको मालूम है की, तू साथ निभा नहीं पायेगा
लेकिन दिल तो दिल है ना, इस दिल को कौन मनायेगा

व्यथित ह्रदय से
'पथिक'
 

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