वो देखो मेघ वो गरज उठे
झर झर करते वो बरस उठे
मन मयूर सबके नाच उठे
मुरझाये चहरे हरष उठे
वो देखो बिना खिवैया के
कागज की कश्तियाँ चली
पहली फुहार में भीगने को
देखो बच्चो की टोलियाँ चली
वो चमक चमक चपला चमकी
कभी ये कडकी कभी वो कडकी
उमीदो को फिर लगे पंख
नाले छलके नदिया छलकी
साजन का मन बेचैन हुआ
चेहरा मन का पट खोल गया
और बारिश की उन बूंदों में
सजनी का मन भी डोल गया
सावन की पहली बारिश में
चेहरों पे रोनक लौट गई
सब सोये अरमा जाग उठे
आँखों में चमक फिर लौट गई
'पथिक'
झर झर करते वो बरस उठे
मन मयूर सबके नाच उठे
मुरझाये चहरे हरष उठे
वो देखो बिना खिवैया के
कागज की कश्तियाँ चली
पहली फुहार में भीगने को
देखो बच्चो की टोलियाँ चली
वो चमक चमक चपला चमकी
कभी ये कडकी कभी वो कडकी
उमीदो को फिर लगे पंख
नाले छलके नदिया छलकी
साजन का मन बेचैन हुआ
चेहरा मन का पट खोल गया
और बारिश की उन बूंदों में
सजनी का मन भी डोल गया
सावन की पहली बारिश में
चेहरों पे रोनक लौट गई
सब सोये अरमा जाग उठे
आँखों में चमक फिर लौट गई
'पथिक'
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