ऐ मालिक जरा इस तरफ तो देख
तेरी बनाई इस दुनिया में ये क्या हो रहा है
कोई चढ़ के बैठा है अपने महलों में
तो कोई सड़क पे पड़ा रो रहा है
कोइ खा के फैंक देता है झूठन
कोई वही झूठन उठा के खा रहा है
कहीं पर लगे हैं कपड़ों के अम्बार
तो कोई तन को भी नहीं ढक पा रहा है
ये देख के क्या तेरा दिल नहीं रोता
या दिल तेरा भी अब पत्थर हो रहा है
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