वो करोड़ों के घपले किए जा रहे हैं
हम जहर का घूंट पिए जा रहे हैं
वो करते जा रहे हैं अय्याशियां
हम फिर भी सहन किए जा रहे हैं
वो लुटाए जा रहे हैं दौलत हमारी
हम लुटाने का मौका दिए जा रहे हैं।
कोई मार जाता है अपनांे को आकर
हम कायर की भांति जिये जा रहे हैं।
सब बरबाद होते हुए देखकर भी
हम होठो को अपने सिये जा रहे हैं।
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